वैश्वीकरण राष्ट्र प्रेम एवं स्वदेश की भावना को आघात पहुँचा रहा है। लोग विदेशी वस्तुओं का उपभोग करना शान समझते है एवं देशी वस्तुओं को घटिया एवं तिरस्कार योग समझते हैं। It is actually an age-old one particular, possessing been handed down by spiritual leaders and sages and is observed https://mylesihehj.luwebs.com/34045429/ex-back-no-further-a-mystery